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महाराष्ट्र में दूध की कीमत 2 रुपये बढ़ गई हैं। दूध के नए रेट 11 अगस्त से लागू होंगे। अब गाय के दूध की कीमत 62 रुपये प्रति लीटर होगी। वहीं, भैंस का दूध 78 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। अब तक गाय का दूध 60 रुपये और भैंस का दूध 76 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा था। डेयरी संचालकों का कहना है कि दूध के परिवहन की लागत बढ़ी है। किसानों से दूध इकट्ठा करने में भी ज्यादा पैसे लग रहे हैं। इस वजह से दूध की कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था।
गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमतें बढ़ने के कारण, राज्य भर के उपभोक्ताओं पर इस मूल्य वृद्धि का असर पड़ने की आशंका है। यह निर्णय दूध की कीमतों को लेकर चल रही चर्चाओं और दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा के उपायों के बीच आया है, साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं कि बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
दूध का एमएसपी लाने का कोई इरादा नहीं
पिछले महीने सरकार ने संसद को सूचित किया कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है, और कहा कि कीमतें बाजार की स्थितियों के आधार पर सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा निर्धारित की जाती रहेंगी। लोकसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि दूध की कीमतें वर्तमान में सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा निर्धारित की जाती हैं, और इस वस्तु के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने कहा कि सरकार दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा करने, दूध की कीमतों को स्थिर करने, उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा करने और देश भर में गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने के लिए कई पहलें लागू कर रही है।
दूध उत्पादकों को संगठित क्षेत्र में ला रही सरकार
दूध उत्पादकों को संगठित क्षेत्र में लाने के उद्देश्य से सरकार ने कहा कि मार्च 2026 तक ग्राम स्तर पर 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियां (डीसीएस) स्थापित की गई हैं, जबकि 31,150 समितियों को सुदृढ़ किया गया है। इसके अलावा, प्रतिदिन 168 लाख लीटर दूध को ठंडा करने की क्षमता विकसित की गई है और 76,748 गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं। प्रतिदिन 418 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमता वाली परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।
10 साल में 69 फीसदी बढ़ा दूध उत्पादन
सरकार के अनुसार, भारत ने 2024-25 में 248 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) दूध का उत्पादन किया, जो 2014-15 के 146 मिलियन मीट्रिक टन से लगभग 69 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इस वृद्धि का श्रेय नस्ल विकास, आनुवंशिक सुधार, मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान, लिंग-आधारित वीर्य और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसे उपायों को दिया। सरकार ने बताया कि 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं, जिससे कवरेज 20 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया है और दूध उत्पादन में 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। (इनपुट- एएनआई)
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