MP से अलवर तक रिश्तों का कत्ल: आखिर क्या है ‘इम्पल्सिव मर्डर’ जिसका शिकार हो रहे पति? जानें क्यों खतरनाक है क्षणिक गुस्सा

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Impulsive Murder Psychology : प्रकृति का नियम है कि रिश्ते भरोसे और प्यार की बुनियाद पर टिके होते हैं, लेकिन हाल ही में मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान, छत्तीसगढ़, अलवर से आई कुछ खबरों ने इस बुनियाद को हिलाकर रख दिया है. एक के बाद एक ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहाँ पत्नियों ने अपने ही पतियों की निर्मम हत्या कर दी. इन वारदातों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये अपराधी पेशेवर मुजरिम नहीं थे, बल्कि ‘इम्पल्सिव मर्डर’ का शिकार हुए आम लोग थे. आइए समझते हैं कि आखिर क्या है यह ‘इम्पल्सिव मर्डर’ और क्यों एक पल का गुस्सा सुखी संसार को श्मशान बना देता है.

क्या है ‘इम्पल्सिव मर्डर’ (What is Impulsive Murder?)
मनोविज्ञान की भाषा में कहें तो ‘इम्पल्सिव मर्डर’ वह अपराध है जो बिना किसी पुरानी योजना या साजिश के, अचानक पैदा हुए तीव्र गुस्से के आवेश में किया जाता है. इसमें व्यक्ति को सही-गलत का होश नहीं रहता और वह पल भर के जुनून (Fit of Rage) में जानलेवा हमला कर बैठता है. हाल ही में मध्य प्रदेश और अलवर की घटनाओं में भी यही पैटर्न दिखा, जहाँ घरेलू विवाद के दौरान अचानक बात इतनी बढ़ गई कि आवेश में आकर हत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया गया.

क्यों आंखों में उतर आता है खून?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के भीतर लंबे समय तक छोटी-छोटी शिकायतें, अपमान या मानसिक प्रताड़ना दबी रहती है, तो वह एक ‘प्रेशर कुकर’ की तरह हो जाता है. किसी मामूली सी बहस के दौरान जब वह धैर्य खो देता है, तो दिमाग का लॉजिकल हिस्सा काम करना बंद कर देता है और ‘इम्पल्सिव बिहेवियर’ हावी हो जाता है.

बढ़ता तनाव बड़ी वजह
आज के दौर में सोशल मीडिया का अत्यधिक दखल, शक करने की बीमारी और बढ़ता वर्क-स्ट्रेस भी इम्पल्सिव मर्डर की एक बड़ी वजह बन रहा है. कुछ हालिया घटनाओं में देखा गया कि मोबाइल फोन या ऑनलाइन चैट को लेकर हुए विवाद ने पति-पत्नी के बीच ऐसी कड़वाहट पैदा की कि वह हत्या तक जा पहुंची. जब इंसान का मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होता है, तो वह क्षणिक गुस्से पर काबू नहीं पा पाता.

पावर डायनेमिक्स और रिश्तों में बदलती भूमिका
पुराने समय के मुकाबले अब रिश्तों के समीकरण बदल रहे हैं. जब घर के भीतर सामंजस्य (Harmony) की जगह सत्ता की लड़ाई या ईगो (Ego) ले लेता है, तो टकराव बढ़ता है. इम्पल्सिव मर्डर के पीछे अक्सर ‘डोमिनेंस’ की भावना छिपी होती है. जब एक पार्टनर को लगता है कि उसकी बात नहीं मानी जा रही या उसे दबाया जा रहा है, तो वह क्षणिक आवेश में हिंसक प्रतिक्रिया देता है.

कैसे पहचानें इसके ‘रेड फ्लैग्स’?
इम्पल्सिव मर्डर अचानक होते हैं, लेकिन इनके संकेत पहले से दिखने लगते हैं. अगर आपके पार्टनर को बात-बात पर चीजें फेंकने, हाथापाई करने या खुद को नुकसान पहुंचाने की आदत है, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह ‘एंगर मैनेजमेंट’ की गंभीर समस्या है. छोटे झगड़ों में ‘साइलेंट ट्रीटमेंट’ देना या अत्यधिक चिल्लाना भी खतरे की घंटी हो सकता है.

बचाव ही एकमात्र उपाय
रिश्तों में संवाद (Communication) की कमी ही हिंसा को जन्म देती है. अगर आपको लगता है कि आप या आपका पार्टनर गुस्से पर काबू नहीं रख पा रहे हैं, तो प्रोफेशनल काउंसलिंग की मदद लेने में कोई बुराई नहीं है. मध्य प्रदेश से अलवर तक की ये घटनाएं हमें चेतावनी दे रही हैं कि हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों की संवेदनशीलता पर काम करने की जरूरत है.

शांत दिमाग, सुरक्षित रिश्ते
प्यार के रिश्ते में टकराव सामान्य है, लेकिन उस टकराव को कत्ल तक ले जाना मानसिक बीमारी का लक्षण है. ‘इम्पल्सिव मर्डर’ की ये घटनाएं समाज के लिए एक वेक-अप कॉल हैं. याद रखें, गुस्से का वह एक पल जिसमें आप आपा खो देते हैं, आपके जीवन की सबसे बड़ी भूल बन सकता है.

(यह लेख हालिया पुलिस रिपोर्टों, अपराध मनोविज्ञान के विशेषज्ञों की राय और विभिन्न समाचार पत्रों में छपी मध्य प्रदेश व राजस्थान की घटनाओं के विश्लेषण पर आधारित है.)



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