मध्य प्रदेश में कोई भी डीलर 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रखेगा। साथ ही स्टॉक को 30 दिन से अधिक समय तक भंडारित भी नहीं करेगा। सभी डीलरों द्वारा भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर स्टॉक की घोषणा को नियमित अद्यतन करना अनिवार्य होगा। मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि इस संबंध में जरूरी कार्यवाही के निर्देश सभी कलेक्टर को दिये गये हैं।
इनपर नहीं लागू होगी सीमा
सामने आई जानकारी के अनुसार, सरकारी खाते पर या राज्य सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकारी द्वारा विशेष रूप से किसी डीलर के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरण के लिये स्टॉक के भंडारण पर यह सीमा लागू नहीं होगी। राज्य सरकार द्वारा इस आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।
थोक उपभोक्ताओं के लिये स्टॉक रखने की सीमा तय
मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोई भी थोक उपभोक्ता, जो उत्पादन, उपभोग या उपयोग के लिये कच्चे माल के रूप में किसी भी प्रकार से प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन चीनी का उपयोग या उपभोग करता है, वह 15 दिनों से अधिक की अवधि के लिये चीनी का स्टॉक नहीं करेगा। थोक उपभोक्ता से मतलब है हलवाई, मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि, जिसने चालू माह को छोड़कर पिछले एक वर्ष के दौरान औसत मासिक खपत के रूप में न्यूनतम 100 मीट्रिक टन का उपयोग किया है।
सरकार लगातार उठा रही कदम
आपको बता दें कि बीते रविवार को चीनी का भाव बाजार में 74 रुपये तक पहुंच गया था। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपये प्रति किलोग्राम रही। ये एक सप्ताह पहले के 63.12 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 1.77 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार ने इस बीच 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके साथ ही थोक उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए चीनी के भंडार की सीमा से जुड़े नियम भी कड़े किए हैं। आपको बता दें कि इससे पहले सरकार ने चीनी के निर्यात पर भी रोक लगा दी थी।
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